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उत्तर प्रदेश के बुनकरों का हड़ताल पावरलूम चक्का जाम

मोहम्मदाबाद गोहाना (मऊ) तथ्य यह है कि बुनकरों के माथे पर शिकन बढ़ रहा है। जब से सरकार ने फ्लैट दरों पर बिजली बिलों का भुगतान करने की सुविधा को समाप्त कर दिया है,गरीब बुनकर इस समस्या से पीड़ित हैं। हमारी आय के स्रोत दैनिक आधार पर दीमक चाट रहे हैं और बिजली की नई दर के अनुसार, हमारे पास मासिक आय भी नहीं है। जैसे ही पावर लूम बंद हुआ कुछ लोगों को पेट में ऐंठन होने लगी और बुनकर आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश भी की  इसलिए बुनकरों को सावधान रहने की जरूरत है। बुनकर नेता ऐन अल-मुजफ्फर अंसारी।



  पूर्व सचिव बुनकर यूनियन जावेद अख्तर भारती, खालिद कमाल अंसारी, हाजी शादाब खान, महमूद अल हसन, अब्दुल करीम
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए बुनकर प्रतिनिधियों को बहुत सावधानी से सरकार के खिलाफ लड़ने की जरूरत है क्योंकि जब भी कोई बुनकर आंदोलन होता है तो उसे तोड़ने का प्रयास किया जाता है। 

क्योंकि सितंबर में अपने ही कुछ लोग शामिल थे जब आंदोलन शुरू हुआ तो सिर्फ आश्वासन के साथ समाप्त हो गया। इसलिए बुनकरों और बुनकर प्रतिनिधियों को इस आंदोलन में अब पिछली परंपराओं को दोहराने से बचना होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन चलेगा जबतक सरकार हमारी मांगो को पूरा नहीं करती। बुनकर समाज में  राजनीतिक चेतना का अभाव है और राजनीतिक रूप से जारूता नहीं है  यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियां हमारे बीच आती हैं


  और तरह-तरह के सब्जबाग दिखाकर हमारे वोट इकट्ठा कर लेती हैं और चुनाव खत्म हो जाने के बाद हमारा पुरसाने हाल कोई नहीं होता और हम हाथ मलते रह जाते हैं जबकि वर्तमान सरकार हमारे सामाजिक स्थिति से पूरी तरह अवगत हैं, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है  इसलिए यह भविष्यवाणी करना संभव है कि बुनकरों का भविष्य अंधकार मे ही दिख रहा है।

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