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चीन से जारी तनाव के बीच इस्लामिक देशों ने दिया भारत को झटका...

इन दिनों भारत पड़ोसी देशों के साथ अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. नेपाल और चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर काफी दिनों से तनाव बना हुआ है. चीन के साथ तो हिंसक झड़प भी हो चुकी है जिसमें एक कमांडर समेत 20 भारतीय जवान मारे गए थे. अब इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कॉपरेशन यानी ओआईसी से भी भारत के लिए बुरी खबर आई है.

ओआईसी के कॉन्टैक्ट ग्रुप के विदेश मंत्री आज जम्मू-कश्मीर को लेकर एक आपातकालीन बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की जाएगी. ओआईसी में जम्मू-कश्मीर मामलों के लिए साल 1994 में यह कॉन्टैक्ट ग्रुप बनाया गया था. अजरबैजान, नीज़ेर, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की इस कॉन्टैक्ट ग्रुप के सदस्य हैं.

भारत के लिए झटका
दरअसल पिछले साल भारत ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर दिया था. इसे लेकर पाकिस्तान ने ओआईसी पर दबाव डाला कि वो भारत के ख़िलाफ कुछ कड़ा बयान जारी करे. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और ओआईसी ने इस मसले पर चुप्पी साध ली. ओआईसी पर सऊदी अरब का प्रभुत्व माना जाता है. सऊदी अरब के समर्थन के बिना ओआईसी में कुछ भी कराना असंभव होता है.

भारत और सऊदी के बीच बहुत बड़े व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं और इसी वजह से अनुच्छेद 370 हटाने पर भी सऊदी अरब ने कोई बयान नहीं जारी किया था. संयुक्त अरब अमीरात ने भी इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मसला बताकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया था. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के इस रुख को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था.

पाकिस्तान की कूटनीतिक कामयाबी
अब ओआईसी में जम्मू-कश्मीर को लेकर होने वाली बैठक को पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक कामयाबी के रूप में पेश करेगा. पिछले साल सितंबर में भी इसी तरह की एक बैठक हुई थी. कश्मीर पर ओआईसी की तटस्थता को लेकर पाकिस्तान ने तुर्की, मलेशिया, ईरान के साथ गोलबंद होने की कोशिश की थी.

इस मसले पर तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी, मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद और पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने कुआलालंपुर समिट में एकजुट होने की योजना बनाई थी लेकिन सऊदी अरब ने इसे ओआईसी को चुनौती के तौर पर लिया था और पाकिस्तान को इस मुहिम में शामिल होने से रोक दिया था.

भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी
ओआईसी की बैठक ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के बीच तनाव चल रहा है. सीमा पर भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई है. नेपाल के साथ भी सीमा पर विवाद चल रहा है और पाकिस्तान के साथ तो हमेशा की तरह तनाव बना ही हुआ है. ऐसे में ओआईसी की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है.

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